मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए माँ विन्ध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध मण्डलीय जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया। इमरजेंसी विभाग के द्वितीय तल पर मेडिसिन विभाग के 45 बेडेड पुरुष वार्ड एवं 45 बेडेड महिला वार्ड का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजीव कुमार सिंह द्वारा किया गया। पूर्व में मण्डलीय जिला चिकित्सालय का संचालन प्रथम एवं द्वितीय तल पर किया जा रहा था। अब उस स्थान पर जनरल सर्जरी वार्ड, आर्थोपेडिक्स वार्ड तथा एच.डी.यू. (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) की स्थापना की प्रक्रिया प्रगति पर है, जिससे गंभीर मरीजों को और बेहतर इलाज मिल सकेगा। उद्घाटन कार्यक्रम के अवसर पर डॉ. एस. के. श्रीवास्तव (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक), डॉ. योगेन्द्र बहादुर सिंह, डॉ. सुनील कुमार सिंह, डॉ. पंकज पाण्डेय, डॉ. क्षितिज राज, डॉ. दुर्गेश सिंह, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. क़ैसीन अख्तर, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. देवर्षि पाठक एवं नर्सिंग अधीक्षिका शकुन्तला देवी सहित अन्य चिकित्सक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। नए वार्डों के शुरू होने से इमरजेंसी सेवाओं को मजबूती मिलेगी और मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए माँ विन्ध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध मण्डलीय जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया। इमरजेंसी विभाग के द्वितीय तल पर मेडिसिन विभाग के 45 बेडेड पुरुष वार्ड एवं 45 बेडेड महिला वार्ड का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) संजीव कुमार सिंह द्वारा किया गया। पूर्व में मण्डलीय जिला चिकित्सालय का संचालन प्रथम एवं द्वितीय तल पर किया जा रहा था। अब उस स्थान पर जनरल सर्जरी वार्ड, आर्थोपेडिक्स वार्ड तथा एच.डी.यू. (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) की स्थापना की प्रक्रिया प्रगति पर है, जिससे गंभीर मरीजों को और बेहतर इलाज मिल सकेगा। उद्घाटन कार्यक्रम के अवसर पर डॉ. एस. के. श्रीवास्तव (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक), डॉ. योगेन्द्र बहादुर सिंह, डॉ. सुनील कुमार सिंह, डॉ. पंकज पाण्डेय, डॉ. क्षितिज राज, डॉ. दुर्गेश सिंह, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. क़ैसीन अख्तर, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. देवर्षि पाठक एवं नर्सिंग अधीक्षिका शकुन्तला देवी सहित अन्य चिकित्सक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। नए वार्डों के शुरू होने से इमरजेंसी सेवाओं को मजबूती मिलेगी और मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।