VINDHYAMOUNT — Header

आज का समय प्रतिस्पर्धा, तकनीक और तेज़ बदलावों का दौर है। ऐसे समय में केवल पुस्तकीय शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी नहीं बन सकती। यदि बच्चों का मन (Mind) और अवचेतन मन (Subconscious Mind) सकारात्मक, अनुशासित और संस्कारित नहीं होगा, तो ज्ञान होने के बावजूद वे जीवन में सही दिशा प्राप्त नहीं कर पाएंगे। इसलिए बच्चों के मानसिक एवं अवचेतन विकास पर गंभीरता से कार्य करना आज परिवार, विद्यालय और समाज – तीनों की साझा जिम्मेदारी बन चुकी है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मनुष्य के व्यवहार, आदतों और निर्णयों का बड़ा हिस्सा उसके अवचेतन मन द्वारा संचालित होता है। बचपन में जो बातें बच्चे बार-बार सुनते, देखते और अनुभव करते हैं, वही धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व का स्थायी हिस्सा बन जाती हैं। यही कारण है कि यदि बच्चों को प्रारम्भ से ही सकारात्मक वातावरण, अच्छे संस्कार, प्रेरणादायक शब्द और अनुशासित दिनचर्या मिले, तो उनका अवचेतन मन भी उसी दिशा में विकसित होता है।

आज कई अभिभावक यह शिकायत करते हैं कि बच्चे मोबाइल में अधिक समय बिताते हैं, पढ़ाई में ध्यान नहीं लगाते, जल्दी गुस्सा करते हैं या अनुशासनहीन व्यवहार करने लगते हैं। इसका मुख्य कारण केवल बाहरी प्रभाव नहीं, बल्कि मानसिक प्रशिक्षण की कमी भी है। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखने के लिए सकारात्मक विचार, प्रेरक वातावरण और भावनात्मक सुरक्षा आवश्यक होती है।

विद्यालयों को भी केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित न रहकर बच्चों के “माइंड डेवलपमेंट” पर विशेष कार्यक्रम चलाने चाहिए। प्रार्थना सभा, ध्यान (Meditation), योग, प्रेरणादायक कहानियाँ, समूह चर्चा, नैतिक शिक्षा तथा रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों के अवचेतन मन को सकारात्मक दिशा देने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होती हैं। शिक्षक यदि बच्चों को डांटने के स्थान पर प्रेरित करने की शैली अपनाएँ, तो उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ सकता है।

परिवार का वातावरण भी बच्चों के मानसिक निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि घर में तनाव, क्रोध और नकारात्मक शब्दों का वातावरण रहेगा, तो उसका सीधा प्रभाव बच्चों के अवचेतन मन पर पड़ेगा। इसके विपरीत यदि माता-पिता बच्चों से प्रेमपूर्वक संवाद करें, उनकी छोटी उपलब्धियों की सराहना करें और उन्हें अच्छे विचार सुनाएँ, तो उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच स्वतः विकसित होने लगती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि सोने से पहले बच्चों को सकारात्मक बातें सुनाना, अच्छे लक्ष्य बताना और प्रेरणादायक कल्पनाएँ कराना अवचेतन मन को मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है। यही अभ्यास आगे चलकर बच्चों में नेतृत्व क्षमता, धैर्य, आत्मनियंत्रण और सफलता की भावना विकसित करता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा प्रणाली में “मानसिक एवं अवचेतन विकास” को भी उतना ही महत्व दिया जाए जितना अकादमिक शिक्षा को दिया जाता है। क्योंकि अच्छे अंक केवल करियर बना सकते हैं, लेकिन सकारात्मक मन और मजबूत अवचेतन शक्ति ही एक श्रेष्ठ नागरिक, सफल व्यक्तित्व और संस्कारित समाज का निर्माण करती है।

यदि हम आने वाली पीढ़ी को सचमुच मजबूत बनाना चाहते हैं, तो हमें बच्चों के मन को समझना होगा, उनके अवचेतन मन को सकारात्मक ऊर्जा से भरना होगा और उन्हें केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि जीवन जीना भी सिखाना होगा। यही स्वस्थ, संस्कारित और आत्मविश्वासी भारत की वास्तविक नींव बनेगी।

विजय दुबे
संपादक, विन्ध्यमाउण्ट समाचार पत्र

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »