मिर्ज़ापुर। सीटी विकास खंड के परवा राजधर स्थिति इंडियन पब्लिक स्कूल में राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी की 156 वीं और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 121वीं जयंती मनाई गयी। विद्यालय के प्रबंधक घनश्याम ओझा ने राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगे को सलामी देकर फहराया। उन्होंने दोनों महान विभूतियों के तस्वीर पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित किया। श्री ओझा ने कहा कि देश की आजादी के लिए गाँधी जी आजीवन संघर्ष करते रहे उन्होंने सत्य और अहिंशा को अपनी ताकत बनाई जिसके बल पर अंग्रेजो को भारत छोड़ने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें महात्मा गांधी के नाम से जाना जाता है इनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। गाँधी जी अहिंसक प्रतिरोध के माध्यम से भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्ति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।. लंदन में वकालत की पढ़ाई के बाद वे दक्षिण अफ्रीका गए, जहाँ गाँधी जी नस्लीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया।भारत लौटने पर, गाँधी जी सत्याग्रह और असहयोग जैसे अहिंसक आंदोलनों का नेतृत्व किया। महात्मा गाँधी स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। उनके पिता करमचंद गांधी एक छोटी रियासत के दीवान थे और उनकी माँ पुतलीबाई एक धार्मिक महिला थीं। उनका विवाह: 13 साल की उम्र में कस्तूरबा गांधी से हुआ था, जो उनके जीवन भर उनके साथ रहीं! 1893 में, गांधीजी नौकरी के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए।
एक बार गाँधी जी ट्रेन से यात्रा कर रहे थे, उन्हें ट्रेन से धक्का देकर बाहर फेंक दिया गया, जो नस्लीय भेदभाव का एक कड़वा अनुभव था। जिसने उनके भीतर अन्याय के खिलाफ लड़ने का संकल्प मजबूत किया.।
- उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भी अहिंसक प्रतिरोध का प्रयोग किया और सत्याग्रह की शुरुआत की!
भारत में स्वतंत्रता संग्राम
भारत आगमन: 1915 में भारत लौटने पर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.! - असहयोग आंदोलन: उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन का नेतृत्व किया, जो अहिंसक प्रतिरोध का एक बड़ा उदाहरण था!
- नमक सत्याग्रह (दांडी यात्रा): 1930 में उन्होंने नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी यात्रा की, जो एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक आंदोलन था.!
- भारत छोड़ो आंदोलन: 1942 में उन्होंने “भारत छोड़ो आंदोलन” का आह्वान किया, जो ब्रिटिश शासन के अंत के करीब था!सत्य और अहिंसा: गांधीजी का जीवन सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित था!सांप्रदायिक सद्भाव: उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सद्भाव पर बहुत जोर दिया, जो भारत के बंटवारे के दौरान बहुत महत्वपूर्ण था.!
- आत्मनिर्भरता: उन्होंने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी के महत्व पर भी बल दिया!30 जनवरी, 1948 को दिल्ली में एक कट्टरपंथी नाथू राम गोडसे ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी. उनके अंतिम शब्द “हे राम” थे। श्री ओझा ने लाल बहादुर शास्त्री को एक ईमानदार, कर्मठ और साहसी प्रधानमंत्री के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि लालबहादुर शास्त्री का जन्म चंदौली जिले में हुआ था ज़ब वे डेढ़ साल के थे तभी उनके पिता जी उन्हें छोड़कर स्वर्गलोग चले गए शास्त्री जी कि प्रारम्भिक शिक्षा मिर्ज़ापुर जनपद में हुई थी उनका ननिहाल और ससुराल भी मिर्ज़ापुर जनपद में था। वे भारत के स्वास्थ्य, रेल मंत्री भी थे उनकी इमानदारी और सादगी आज जन जन के जुबान पर है वे जय जवान जय किसान का नारा देकर किसानों और सैनिको का मनोबल मजबूत किया। आज हमारे बीच गाँधी और शास्त्री जी नहीं है किन्तु उनकी कृतिया हमारे लिए पथ प्रदर्शक है। इस अवसर कल्पना ओझा, विकास ओझा, रौशनी दुबे, बुलबुल राही, आंचल सिंह आदि लोगो ने भी अपने विचार व्यक्त किये