भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) भारतीय किसानों, मछुआरों, कारीगरों और व्यवसायों को वैश्विक स्तर पर पहचान देने के साथ-साथ रोज़गार के असंख्य अवसरों का सृजन करेगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप लोगों को प्रतिस्पर्धी दरों पर उच्च-गुणवत्ता वाली वस्तुएं प्राप्त करने में सहायता प्रदान करेगा। भारत और ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए), ऑस्ट्रेलिया, यूरोप के मुक्त व्यापार समझौते और संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य विकसित देशों के साथ इसी तरह के समझौतों के अनुरूप है। यह मोदी सरकार के विकसित भारत 2047 के स्वप्न को साकार करने के क्रम में आर्थिक विकास और रोज़गार सृजन को अधिकतम करने की रणनीति का एक हिस्सा है। प्रधानमंत्री की रणनीति- वर्ष 2014 में, मोदी सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्विक विश्वास को पुन: स्थापित करने तथा इसे भारतीय और विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने के लिए एक दृढ़ रणनीति अपनाई। विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर करना, इस व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है। एफटीए, व्यापार नीतियों के बारे में अनिश्चितताओं को दूर करते हुए निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाते हैं। विकसित देशों के साथ एफटीए, जिनके भारत के साथ प्रतिस्पर्धी व्यापारिक हित नहीं हैं, दोनों पक्षों के लिए लाभप्रद है, जबकि पिछली सरकार ने भारत के दरवाजे प्रतिद्वंद्वी देशों के लिए खोलकर भारतीय व्यवसायों को खतरे में डालने का रवैया अपनाया था। यूपीए शासनकाल में, विकसित देशों ने भारत के साथ व्यापार वार्ता लगभग रोक दी थी और उस समय भारत को दुनिया की “पाँच कमजोर” अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भारत का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2014 से लगभग तीन गुना बढ़कर लगभग 331 लाख करोड़ रुपये हो गया है। क्रांतिकारी सुधारों, व्यापार में आसानी और प्रधानमंत्री के वैश्विक व्यक्तित्व ने भारत को एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरने में सहायता की है। आज, दुनिया भारत की अद्भुत गाथा में भागीदारी के साथ-साथ एफटीए पर हस्ताक्षर करना चाहती है। बाजार पहुंच, प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त- यह एफटीए ब्रिटेन के बाजार के सभी क्षेत्रों में भारतीय वस्तुओं के लिए व्यापक बाजार पहुंच सुनिश्चित करेगा। यह लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों के टैरिफ को समाप्त करते हुए व्यापार मूल्य के लगभग 100 प्रतिशत को कवर करता है। इस समझौते के अंतर्गत 56 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार से सृजित होने वाले व्यापक अवसरों के वर्ष 2030 तक दोगुना होने का अनुमान है।