प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (Comprehensive Economic and Trade Agreement – CETA) पर हस्ताक्षर करके भारत और यूनाइटेड किंगडम ने एक मज़बूत आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस महत्वपूर्ण समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार एवं व्यापार राज्य मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारतीय निर्यात को नए वैश्विक अवसर प्रदान करेगा और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख औद्योगिक केंद्र — मुरादाबाद, कानपुर और नोएडा — के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगा। उत्तर प्रदेश के इन तीन शहरों की विशिष्ट उत्पादन क्षमताएँ और निर्यातोन्मुखी उद्योग ब्रिटिश बाजार में पहले से ही एक मजबूत पहचान रखते हैं। इस एफटीए के लागू होने से इन क्षेत्रों को आयात शुल्क समाप्ति का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे उनके उत्पाद प्रतिस्पर्धात्मक कीमत पर ब्रिटेन पहुँच सकेंगे। मुरादाबाद, जो पीतल शिल्प और हस्तनिर्मित धातु उत्पादों के लिए विश्वप्रसिद्ध है, अब ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त निर्यात का लाभ उठाकर अपने पारंपरिक कारीगरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकेगा। यह क्षेत्र ‘पितल नगरी’ के नाम से जाना जाता है और इस समझौते से यहाँ के कुटीर और लघु उद्योगों को व्यापक लाभ होगा। कानपुर, भारत का ऐतिहासिक चमड़ा उद्योग केंद्र, जो वर्षों से यूरोपीय बाजार में जूतों, बेल्ट, बैग और जैकेट जैसे चमड़ा उत्पादों का प्रमुख निर्यातक रहा है, अब ब्रिटिश बाजार में प्रतिस्पर्धा में और भी आगे निकल सकेगा। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हज़ारों लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगा। नोएडा, रेडीमेड गारमेंट्स और टेक्सटाइल उद्योग का एक आधुनिक और गतिशील केंद्र, इस एफटीए के माध्यम से अपनी वैश्विक उपस्थिति को और सशक्त करेगा। शुल्क हटने के कारण यूरोपियन खुदरा ब्रांड्स अब भारतीय परिधानों को अधिक संख्या में और बेहतर मूल्य पर खरीद सकेंगे, जिससे नोएडा का निर्यात तेज़ी से बढ़ेगा। भारत सरकार का उद्देश्य इस समझौते को संतुलित एवं समावेशी बनाना है ताकि भारत के पारंपरिक एवं आधुनिक दोनों प्रकार के उद्योगों को लाभ मिल सके। वाणिज्य मंत्रालय निर्यातकों को लॉजिस्टिक, प्रमाणीकरण और विपणन सहायता प्रदान कर रहा है, ताकि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठा सकें। भारत–यूके एफटीए से जुड़े संवाद और वार्ताएं अब पूर्ण हो चुकी हैं और यह समझौता जल्द ही लागू होगा। इस ऐतिहासिक पहल से उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को विशेष लाभ मिलेगा, जहाँ स्थानीय कारीगरों, एमएसएमई और उद्योगपतियों के लिए वैश्विक बाज़ार में विस्तार के नए द्वार खुलेंगे। यह समझौता प्रधानमंत्री के ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ दृष्टिकोण को ज़मीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाएगा।

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