विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के पीछे हो रहे घोटालों में बिजली राजस्व के बकाए की धनराशि को एक बड़ी वजह बताया है। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के पीछे चल रहे कई घोटाले में निजी घरानों की नजर विद्युत वितरण निगमों के राजस्व बकाये पर रहती है। उत्तर प्रदेश में आगरा इसका उदाहरण है जहां टोरेंट पावर कंपनी ने 15 साल गुजर जाने के बाद भी राजस्व बकाये की धनराशि पॉवर कॉरपोरेशन को नहीं दी है। संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के इस वक्तव्य का स्वागत किया है कि मनमाने ढंग से कुशल संविदा कर्मियों को बड़े पैमाने पर हटा दिया गया है जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है। संघर्ष समिति ने कहा है कि जब ऊर्जा मंत्री ने यह स्वीकार कर लिया है कि संविदा कर्मियों को गलत ढंग से हटाया गया है और उनके हटाए जाने से बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है तब उन्हें तत्काल पावर कारपोरेशन को निर्देश देना चाहिए कि मार्च 2023 की हड़ताल में हटाए गए संविदा कर्मी और विगत कुछ महीनो में निजीकरण के नाम पर हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाय। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि जब आगरा शहर की बिजली व्यवस्था 01 अप्रैल 2010 को टोरेंट पावर कंपनी को सौंपी गई तब आगरा शहर का बिजली राजस्व का बकाया लगभग 2200 करोड रुपए था। समझौते के अनुसार यह धनराशि टोरेंट पावर कंपनी को एकत्र कर पावर कारपोरेशन को वापस करनी थी। पावर कॉरपोरेशन इस धनराशि का 10% इंसेंटिव के रूप में टोरेंट पावर कंपनी को देती। लगभग 15 वर्ष से अधिक का समय व्यतीत हो गया है और टोरेंट पावर कंपनी ने एक पैसा भी पावर कारपोरेशन को वापस नहीं किया है। अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी करार के अंतर्गत यह एक प्रमुख शर्त थी जिसका टोरेंट पावर कंपनी खुले आम उल्लंघन कर रही है। इसके अतिरिक्त कैग की रिपोर्ट में टोरेंट पावर कंपनी पर कई शर्तों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संघर्ष समिति ने मांग की है कि राजस्व बकाये की धनराशि हड़प जाने और करार की कई शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में टोरेंट पावर कंपनी का अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी करार तत्काल निरस्त किया जाए। संघर्ष समिति ने कहा है कि पूर्वांचल निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में राजस्व बकाये की धनराशि लगभग 66 हजार करोड रुपए है। संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा तैयार किए गए निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट में लिखा है कि निजीकरण के बाद निजी कंपनियां राजस्व बकाये की धनराशि का मात्र 40% वसूल कर पावर कारपोरेशन को वापस करेंगी। इसका तात्पर्य यह हुआ कि राजस्व बकाये की शेष 40 हजार करोड रुपए की धनराशि निजी घरानों की जेब में मुफ्त में चली जाएगी। यह अपने आप में बड़ा घोटाला है। आगरा में टोरेंट पावर कंपनी का उदाहरण सामने लेकर चलें तो 40% धनराशि भी निजी कंपनियां वसूलकर पावर कॉरपोरेशन देगी या नहीं इस पर सवाल लगा हुआ है ? संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 246 वें दिन बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मीरजापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध प्रदर्शन किया गया।
विरोध सभा इंजीनियर दीपक सिंह की अध्यक्षता एवं संचालक विनोद चौधरी के नेतृत्व में संपन्न हुई जिसमें इंजीनियर रामबहादुर यादव शेखर सिंह अंशु कुमार पांडे राम सिंह प्रमोद कुमार पंकज कुमार विनय कुमार गुप्ता विनय कुमार प्रमोद कुमार राजेश कुमार गौतम रमेश कुमार रामजन्म यादव धर्मेंद्र बाबू सूयस आशुतोष बाजपेई दीपक गुप्ता आदि मौजूद रहे।