शिक्षक संघ ने सरकारी स्कूलों के विलय के फैसले को शिक्षा के अधिकार अधिनियम-2009 और बाल अधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए इसके खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। संघ का कहना है कि अधिनियम के अनुसार, 300 की आबादी पर 1 किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक विद्यालय और 800 की आबादी पर 3 किलोमीटर के दायरे में उच्च प्राथमिक विद्यालय होना अनिवार्य है। स्कूलों के विलय से ग्रामीण और गरीब बच्चों की शिक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों के आसपास निजी विद्यालयों को नियम-विरुद्ध मान्यता दी जा रही है, जिससे परिषदीय विद्यालय कमजोर हो रहे हैं। कई विकास खंडों में स्कूल शिक्षक की कमी के कारण या तो एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं या पूरी तरह बंद हैं। इसके अलावा, शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे हैं, जो उनकी शिक्षण क्षमता को प्रभावित कर रहा है। शिक्षक संघ ने विभागीय अधिकारियों पर गैर-मान्यता प्राप्त विद्यालयों को बंद करने में रुचि न लेने का भी आरोप लगाया। प्रदर्शन में रमाकांत दुबे, अखिलेश सिंह, सत्येंद्र कुमार सिंह, सुधीर तिवारी सहित कई शिक्षक शामिल रहे। संघ ने मांग की कि स्कूल विलय का फैसला तत्काल वापस लिया जाए और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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