विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की ऑनलाइन हुई आमसभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस नहीं लिया जाता। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 244 दिन पूरे होने पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आम सभा कर बिजली कर्मियों के विचार आमंत्रित किए थे। सभी संवर्गो के बिजली कर्मियों ने एक स्वर में कहा कि निजीकरण किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है और आंदोलन जारी रहे। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने पुनः कहा है कि बिजली कर्मी उपभोक्ता सेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित है। आंदोलन करना बिजली कर्मचारियों का स्वभाव नहीं है। उड़ीसा, नागपुर, औरंगाबाद, जलगांव, आगरा, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, भागलपुर, उज्जैन, सागर, ग्वालियर, रांची, जमशेदपुर आदि स्थानों पर निजीकरण का प्रयोग पहले ही विफल हो चुका है। आगे संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले 42 जनपदों में प्रदेश की सबसे गरीब जनता रहती है। निजी घराने मुनाफा के लिए काम करते हैं जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के लिए बिजली एक सेवा है। ऐसे में निजीकरण के बाद बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि होगी जिसे इन जनपदों की गरीब जनता बर्दाश्त नहीं कर सकती। निजीकरण का निर्णय व्यापक जनहित में तत्काल निरस्त किया जाए। बिजली कर्मी उसी क्षण आंदोलन समाप्त कर दिन रात बिजली व्यवस्था सुधारने के कार्य में जुट जाएंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि विधानसभा का सत्र प्रारंभ होने के पहले ही समस्त विधायकों को एक पत्र भेजकर झूठे आंकड़ों और भय के वातावरण के बीच निजीकरण करने की पूरी दास्तान बताइ जाएगी। उत्पीड़न के नाम पर पहले संविदा कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया, उसके बाद फेसियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन रोका गया, हजारों बिजली कर्मचारियों को प्रशासनिक आधार पर दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर कर दिया गया, रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने की दृष्टि से बिजली कर्मियों के घरों पर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। स्टेट विजिलेंस की झूठी जांच करा कर संघर्ष समिति के पदाधिकारियों पर एफ आई आर की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि सबसे बड़ा उत्पीड़न 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री की घोषणा के बाद ढाई वर्ष गुजर जाने के बावजूद बिजली कर्मियों पर की गई कार्यवाहियों को वापस न लेना है। ऊर्जा मंत्री समझौते से मुकर गए हैं और अब संघर्ष समिति के पदाधिकारी, जिनके साथ उन्होंने लिखित समझौता किया था, के साथ वार्ता करने के लिए भी तैयार नहीं है। इससे पूरे प्रदेश की बिजली कर्मचारियों में भारी गुस्सा व्याप्त है।