पंचायत सहायक यूनियन उत्तर प्रदेश ने एग्रीस्टैक डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) कार्य में पंचायत सहायकों की भागीदारी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यूनियन ने विकास खंड-कोन, मीरजापुर के खंड विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि शासनादेश के अनुसार यह कार्य निजी सर्वेयरों को दिया जा रहा है, लेकिन पंचायत सहायकों को भी इसमें जोड़े जाने की संभावना जताई जा रही है। यूनियन ने इसे अस्वीकार्य बताते हुए स्पष्ट किया कि पंचायत सहायकों के पास न तो जीपीएस समर्थित मोबाइल संसाधन उपलब्ध हैं और न ही वे अकेले सचिवालय छोड़कर फील्ड कार्य कर सकते हैं। संगठन ने तर्क दिया कि यह कार्य कृषि विभाग का है, जबकि पंचायत सहायकों की जिम्मेदारी पंचायती राज विभाग से जुड़ी है। साथ ही प्रोत्साहन राशि अत्यंत कम और कार्यभार अधिक होने से पंचायत सहायकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यूनियन ने मांग की है कि पंचायत सहायकों को इस सर्वे कार्य से अलग रखा जाए ताकि वे अपने नियमित कार्य सुचारू रूप से कर सकें।उत्तर प्रदेश पंचायत सहायक यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन जारी किया है। यूनियन का कहना है कि पंचायत सहायकों से विभिन्न विभागों का कार्य लिया जा रहा है, जबकि उन्हें न तो उचित संसाधन मिलते हैं और न ही सम्मानजनक मानदेय। प्रमुख मांगों में उच्च गुणवत्तायुक्त मोबाइल फोन उपलब्ध कराना, हर विभाग द्वारा निश्चित मानदेय देना, कार्य का पूरा भुगतान करना और क्रॉप सर्वे के दौरान संभावित हादसों पर 10 लाख रुपए का बीमा व आश्रित को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था शामिल है। संगठन का कहना है कि ग्राम पंचायत सचिवालय संचालन और योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पंचायत सहायकों की है, ऐसे में अन्य विभागीय कार्य देना अनुचित है। महिला पंचायत सहायकों को दुर्गम क्षेत्रों में सर्वे कराना भी सुरक्षा की दृष्टि से जोखिमपूर्ण बताया गया है। यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तो पंचायत सहायक डिजिटल क्रॉप सर्वे कार्य करने में असमर्थ होंगे।