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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश 15 सितम्बर को अभियन्ता दिवस’ के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करती है कि वे उप्र राज्य विद्युत परिषद की तरह प्रदेश के ऊर्जा निगमों में विशेषज्ञ बिजली इंजीनियरों को शीर्ष प्रबंधन के पदों पर तैनात करने की घोषणा कर विद्युत परिषद के समय के स्वर्णिम काल को वापस करें। संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने यह कहा कि बिजली कर्मी और अभियंता मुख्यमंत्री से उम्मीद करते हैं कि वे अभियन्ता दिवस के अवसर पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने का तोहफा बिजली कर्मियों को देंगे जिससे बिजली कर्मी उनके अत्यन्त कुशल नेतृत्व में प्रदेश की बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार कर 2047 में समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश का सपना साकार करने में पूरी एकाग्रता से जुट जाएं। उल्लेखनीय है कि 05 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को कैशलैस इलाज का तोहफा देकर सुखद आश्चर्य दिया था। इसी क्रम में बिजली कर्मी और अभियन्ता सरकारी क्षेत्र में बने रहने के तोहफे की उम्मीद लगाए हुए हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी किसी भी चुनौती के समय सदा ही कसौटी पर खरे उतरे हैं। चाहे महाकुंभ में निर्बाध बिजली आपूर्ति की बात हो या भीषण गर्मी में देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति का नया कीर्तिमान बनाने की बात। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने निजी क्षेत्र की नौकरी छोड़कर पावर कारपोरेशन में सरकारी क्षेत्र की नौकरी ज्वाइन की थी। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के सरकारी क्षेत्र में बने रहते हुए उन्हें सेवा पूरी करने का अवसर मिले यही आकांक्षा है। विरोध सभा में इंजीनियर दीपक सिंह, विनय गुप्ता, रमेश कुमार वैश्य, जितेश कुमार, पवन कुमार, पंकज कुमार, संजय कुमार, शिव शंकर सिंह आदि मौजूद रहे।

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