विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु तैयार किए गए दस्तावेज और ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को व्यापक जनहित में सार्वजनिक किया जाना चाहिये। इस बीच वाजपेई सरकार में विद्युत सचिव रहे पूर्व आई ए एस अधिकारी ई ए एस शर्मा ने डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों और मीटर आपूर्तिकर्ता कंपनियों से संलिप्तता तथा फंडिंग को लेकर सवाल उठा दिया है। संघर्ष समिति ने कहा है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की योगी आदित्यनाथ की सरकार में उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और कुछ निजी घरानों से मिलीभगत में निजीकरण का आर एफ पी डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वह इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर प्रभावी कार्यवाही करने की कृपा करें विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु जब ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई थी तब उस डॉक्यूमेंट में यह लिखा था कि ट्रांजैक्शन कंसलटेंट निजीकरण में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की मदद करेंगे और इस हेतु ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 को आधार माना जाएगा। संघर्ष समिति ने कहा की ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और कई अन्य संगठनों ने अपनी लिखित आपत्ति दर्ज की थी। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने आज तक ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 को अंतिम स्वरूप नहीं दिया है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने उप्र विद्युत नियामक आयोग को निजीकरण हेतु जो आरएफपी डॉक्यूमेंट भेजा है उसमें निजीकरण का आधार ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 लिखा गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने के बाद आरएफपी डॉक्यूमेंट बनाने में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 के स्थान पर 2025 का उल्लेख किया गया है। यह बहुत महत्वपूर्ण व्यतिक्रम है।ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 न तो पब्लिक डोमेन में है और न ही इसे भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला गया है। इसे राज्य सरकारों और विद्युत वितरण निगमों को भी सर्कुलेट नहीं किया गया है और इस पर किसी की आपत्ति भी नहीं मांगी गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों की लाखों करोड़ रुपए की विद्युत वितरण की परिसंपत्तियों को जिस ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 के आधार पर निजी घरानों को बेचने की तैयारी है उसे व्यापक जनहित में तत्काल सार्वजनिक किया जाना चाहिए।