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एसओएस चिल्ड्रन विलेज वाराणसी के चौबेपुर स्थित संस्थान की ओर से एक चार दिवसीय “ज़ोन एक की माताएँ और मौसियाँ” कार्यशाला का आयोजन द्वारा होटल बुद्धा पार्क ,पहड़िया में किया गया l मुख्य अतिथि कर्नल विनोद कुमार, पोस्टमास्टर जनरल वाराणसी ने उद्घाटन प्रार्थना और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया l कार्यक्रम में श्री पंकज, जिला प्रोबेशन अधिकारी-विशिष्ट अतिथि, सुश्री स्नेहा उपाध्याय, अध्यक्ष, मानद अतिथि, श्री प्रदीप जारवाल, क्षेत्रीय निदेशक-सुविधाकर्ता,सुश्री अनुराधा अबरोल, सीपीओ-एफएल, सुश्री पूजा अवस्थी भी साथ में उपस्थित थे। कार्यशाला का मुख्य विषय “सुरक्षित, सुसंस्कृत और भविष्य के लिए तैयार परिवारों के निर्माण के लिए माताओं को ज्ञान, मूल्यों और कौशल से सशक्त बनाना” है l जिसका उद्देश्य संगठनात्मक मूल्यों, कानूनी अनुपालन और विकसित हो रही देखभाल प्रथाओं के साथ तालमेल बिठाते हुए, बच्चों और युवाओं के लिए सुरक्षित, पोषण और विकासात्मक रूप से सहायक वातावरण प्रदान करने के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास के साथ माताओं को सशक्त बनाना है । इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आई 40 माताएं शिरकत कर रहीं हैं जो अपने अनुभव और विचार दूसरों के साथ साझा करेंगी। कर्नल विनोद ने बताया कि वे इन माताओं को सैलूट करते हैं क्योंकि आज के समय में एक बच्चे की परवरिश करना मुश्किल होता है और की माताएं कम से कम आठ बच्चों की देखभाल करती हैं। चार दिवसीय कार्यशाला में बोलते हुए कर्नल विनोद कुमार ने कहा कि महिला सशक्तिकरण को मजबूत बनाए जाने की जरुरत है और सभी माताओं को पढ़ना चाहिए जिससे वे बच्चो को ज्ञान से अपडेट कर सके और उनकी देखभाल सही तरीके से कर सके।
सुश्री शैली ने बताया कि एसओएस चिल्ड्रेन्स विलेजेज 1984 से वाराणसी में बच्चों, युवाओं और परिवारों को सहायता प्रदान कर रहा है तथा उनके अधिकारों की वकालत कर रहा है। एसओएस चिल्ड्रेन्स विलेजेज परिवारों को एक ऐसा अनुकूल वातावरण बनाने में सहायता करता है, जहां उनके बच्चे विकसित हो सकें और फल-फूल सकेंI बच्चे इन परिस्थितियों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं, क्योंकि वे सुरक्षित, स्वस्थ और सुपोषित रहने के लिए संघर्ष करते हैं। श्री पंकज ने कहा कि जेंडर असमानता अभी भी समाज में व्याप्त है और जब माता-पिता कठिनाइयों का सामना करते हैं, तो उन्हें कभी-कभी बच्चों को ज़रूरी देखभाल देने में मुश्किल होती है तो ज्यादातर् लड़कों को प्राथमिकता देते हैं। सुश्री स्नेहा ने कहा कि सभी महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए ताकि समाज में उनकी पहचान बने और उन्हें अपने जीवन में आगे बढ़ने के अवसर मिले। सुश्री अनुराधा अबरोल ने बताया कि एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज स्थानीय साझेदारों और समुदायों के साथ मिलकर काम करता है। हर परिवार को साथ रहने के लिए अलग-अलग मदद की ज़रूरत होती है। इस मदद में पालन-पोषण और बच्चों के अधिकारों पर कार्यशालाएँ शामिल हो सकती हैं। एसओएस चिल्ड्रेन्स विलेजेज प्रशिक्षण भी चलाते हैं ताकि माता-पिता नौकरी पाने या व्यवसाय शुरू करने के लिए ज़रूरी कौशल हासिल कर सकें। यह चार दिवसीय कार्यशाला माताओं के सर्वांगीण विकास और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जिसमे पहले दिन परिचय और पालन –पोषण की जरूरतों को समझना ,दूसरे दिन पुनर्कथन और प्रश्नोत्तरी तथा दैनिक तत्परता को बढावा देकर परिवार के घरो को अचानक आने वाकले दौरे के लिए कैसे तैयार किया जाय, तीसरे दिन भी पुनर्कथन और प्रश्नोत्तरी तथा माताओं का भवनात्मक कल्याण तथा चौथे दिन अनुशासन की वैकल्पिक विघि विषय पर कार्यशाला होनी है l इस कार्यशाला में 40 से अधिक मदर अन्य जिलो से आयी हुई थी जिनको इस कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जा रहा है जिससे वे अन्य मदर को ट्रेनिंग दे सकेजिससे बच्चो का पूर्ण रूप विकास हो सके और अपने भविष्य को सुरक्षित तथा बेहतर कर सकें।

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