प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में लगभग 2,200 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सावन के पावन माह में वाराणसी के परिवारों से मिलकर उनसे अपनी हार्दिक भावनाएं व्यक्त की। वाराणसी के लोगों के साथ अपने गहरे भावनात्मक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए, मोदी ने शहर के प्रत्येक परिवार के सदस्य के प्रति अपना आदरपूर्वक अभिवादन किया। मोदी ने सावन के पावन महीने में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश भर के किसानों से जुड़ने पर भी संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह उनकी वाराणसी की पहली यात्रा है। उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को याद करते हुए कहा कि इसमें 26 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मोदी ने पीड़ित परिवारों, विशेषकर इस त्रासदी से प्रभावित बच्चों और बेटियों के दुःख को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका हृदय इस दुःख से अत्यंत व्याकुल है और प्रधानमंत्री ने बताया कि उस दौरान उन्होंने बाबा विश्वनाथ से सभी शोक संतप्त परिवारों को यह कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि बेटियों के सिंदूर का बदला लेने का उनका वादा पूरा हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भगवान महादेव के आशीर्वाद से ही संभव हुआ है और उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को भगवान महादेव के चरणों में समर्पित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि हाल के दिनों में, वे वाराणसी में शिव भक्तों की दिव्य छवियां देख रहे थे, विशेषकर सावन के पहले सोमवार को, जब तीर्थयात्री बाबा विश्वनाथ का पवित्र जलाभिषेक करने के लिए निकलते हैं। उन्होंने गौरी केदारनाथ से अपने कंधों पर पवित्र गंगाजल लाते यादव बंधुओं के मनोरम दृश्य का उल्लेख करते हुए इसे बेहद मनमोहक बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि डमरू की ध्वनि के साथ गलियों में जीवंत ऊर्जा का वातावरण अलौकिक था। मोदी ने सावन के पवित्र महीने में बाबा विश्वनाथ और मार्कंडेय महादेव के दर्शन करने की अपनी व्यक्तिगत इच्छा व्यक्त की। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी उपस्थिति महादेव के भक्तों को असुविधा का कारण बन सकती है या उनके दर्शन में बाधा बन सकती है, इसलिए वे यहीं से भगवान भोलेनाथ और मां गंगा को प्रणाम करते हैं। भारत के तमिलनाडु में शैव परंपरा के एक प्राचीन ऐतिहासिक केंद्र गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर और एक हज़ार वर्ष प्राचीन स्मारक की कुछ दिन पहले की अपनी यात्रा का स्मरण करते हुए, मोदी ने कहा कि इस मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध राजा राजेंद्र चोल ने करवाया था, जो उत्तर और दक्षिण को प्रतीकात्मक रूप से एक करने के लिए उत्तर भारत से गंगाजल लेकर आए थे। उन्होंने कहा कि एक हज़ार वर्ष पहले, भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति और शैव परंपरा के लिए प्रतिबद्धता के माध्यम से, राजेंद्र चोल ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के विजन का उद्घोष किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज, काशी-तमिल संगमम जैसी पहलों के माध्यम से उस विरासत को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गंगईकोंडा चोलपुरम की अपनी हाल की यात्रा के दौरान, वे अपने साथ गंगाजल लेकर गए थे और मां गंगा के आशीर्वाद से, अत्यंत पवित्र वातावरण में पूजा संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण अवसर देश में एकता की भावना को जगाते हैं, जिससे ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों को सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की एकता ऑपरेशन सिंदूर की ताकत बनी।वाराणसी में आयोजित किसान महोत्सव के भव्य आयोजन का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत देश भर के 10 करोड़ किसान भाई-बहनों के बैंक खातों में 21,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के दौरान 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। मोदी ने कहा कि बाबा के आशीर्वाद से वाराणसी में विकास की अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों और देश के सभी किसानों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले ही वाराणसी में सांसद पर्यटक गाइड प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। आने वाले दिनों में, काशी सांसद फोटोग्राफी प्रतियोगिता और सांसद रोजगार मेला जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जायेगा। उन्होंने इन पहलों की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ऐसी पहलों के लिए प्रशासन की भी सराहना की। मोदी ने इस बात पर बल दिया कि सरकार किसानों की समृद्धि के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने पिछली सरकारों से इसकी तुलना करते हुए कहा कि उस समय किसानों के नाम पर की गई एक भी घोषणा शायद ही कभी पूरी हुई हो। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अपने वादों को पूरा करती है, और पीएम-किसान सम्मान निधि को सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।