कजली महोत्सव के उद्घाटनकर्ता सांसद राम शकल थे तथा मुख्य अतिथि जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने कहां की गांवों के भ्रमण काल में मैंने वहां की महिलाओं एवं बालिकाओं में पाया कि वे कजली जानती एवं गाती भी है।
मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि आज भी कजली मीरजापुर में जीवित है।
राम शकल जी ने “बीरन भैया अइलेन अनवइयां सवनवां में ना जैबे ननदी” तथा “कहवां से आवै राधा प्यारी,पड़ेला झीर झीर बुनियां”परंपरागत लाय में गाकर लोगों को अचंभित कर दिया। संस्कार भारती काशी प्रांत अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ गणेश प्रसाद अवस्थी ने कहा कि व्यक्तित्व की परिपूर्णता तथा मानवीय मूल्यों के लिए साहित्य संगीत एवं कला आवश्यक होता है। इसीलिए हमारे पूर्वजों ने सभी संस्कारों, ऋतुओं एवं महीनों में संगीत को परंपरा में डाला।
बोकारो आयी रंजना राय ने “कैसे खेलन जाबू सावन में कजरियां, बदरिया घेरी आवे ननदी”तथा”पिया मेहंदी लीआइद मोतीझील से जाइके साइकिल से ना”पूरे लाइन में गाकर खूब वाह- वाही लूटी।
इस अवसर पर 74 वर्षीय वरिष्ठ कजली गायिका उर्मिला श्रीवास्तव जी को ” विंध्य रत्न” प्रदान करते हुए उनका सम्मान किया गया। उर्मिला जी ने “झूला धीरे से झुलव बनवारी, अरे सांवरियां” तथा “हमें सावन में झूलनी कढ़ाई द पिया, जिया बहलाइद पिया ना”को श्रोताओं ने खुब सराहा।
ख्यातिलब्ध गायिका उषा गुप्ता ने “मैया झूले चनन झुलनवां पवनवां चवर डुलावै ना”तथा “मीरजापुर कैले गुलजार कचौड़ी गली सून केईल बलमु “गीत पर खूब तालियां बजी।
इसी क्रम में प्रयागराज से पधारी रागिनी चंद्रा, संस्कार भारती मिर्जापुर इकाई के लोक कला प्रमुख शिवलाल गुप्ता, सुश्री कल्पना गुप्ता, सुरेश मौर्य,
मनोज शर्मा, श्रीमती अर्चना पांडेय, देवी प्रसाद मौर्य आदि ने भी कजली गायन प्रस्तुत किया।
आयोजन की सफलता में डॉक्टर संदीप श्रीवास्तव, डॉक्टर अरविंद अवस्थी, शिवलाल गुप्ता श्रीमती उर्विलास श्रीवास्तव की भूमिका सराहनी रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां विंध्यवासिनी के चित्र पर माल्यार्पण दीप प्रज्वलन , वेद विद्यालय के छात्रों के वैदिक मंत्रोच्चार तथा समापन वंदे मातरम् से किया गया।
कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर गणेश प्रसाद अवस्थी, संचालन शिवराम शर्मा तथा धन्यवाद ज्ञापन शशांक शेखर चतुर्वेदी द्वारा किया गया ।